A tribute to Gauri Lankesh by my father Ajay Ratnaker

कलम अमीर हो जाये ,ख़ुशी की बात है

कलम ज़मीर ना खो दे, देखना

कलम रुक जाए ,वक़्त की बात है

कलम झूक ना जाये देखना

कलम चूक जाये, हो सकता है

कलम बीक ना जाये देखना

कलम बयाँ करे मिजाजे इश्क,पाबंदी तो नहीं

कलम बेखबर ना रहे,

हिचकियो से, सिस्कियो से, देखना

कलम आग लगा दे, फ़ितरत है!!!

गरीबो की बस्तियाँ ना जले, देखना

बे-खौफ होना ही वजूद है उसका,

हुक्मरानों की बांदी ना बन जाये,देखना

म्यान होता नहीं कलम का,

कोई मखमल ना लपेट दे,देखना

रंग जानना आँसू का,ढंग हंसी का,

कलम की तरक़ीब है,

बेबाक चलना मज़हब है,

तदबीर से ही तो गजब है,

कोई उसकी तकदीर ना लिख दे, देखना

जम्हूरियत की रूह पाक है,उसकी दखल से

कहीं कोई नापाक,बेदखल ना कर दे,देखना

हर पल उबलती है, सांच जनने को

बेईमानी कहीं कोख ना चीर दे, देखना

रगो में उसकी दौड़ ने को,

हाजिर मेरे खून का हर कतरा,

कलम की कोई स्याही ना सुखा दे, देखना

                                             –अजय रत्नाकर

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